कविता
एक बात तो कॉमन है
चाहे बैठे हों खेत खलिहान मेंया हो उड़ानकहीं ऊँचे विमान मेंहोता होकिसी आलीशान मकान में सवेराया कहीं किसीकच्ची मढ़ैया में बसेराहों व्यापारी अधिकारीया कोईबड़े नेताखिलाड़ी हों आपया कोई अभिनेताघूमते हों सुबह शाम पैदलया बस मेंया गुज़रता हो दिनज़िन्दगी के सरकस मेंअलबत्ता सबके जीवन मेंएक बात तो कॉमन हैवो हैबस दो की तलाशइक तो ईश्वरजो कभी दिखता नहीं हैदूजा प्यारजो कभी मिलता नहीं है