84 रचनाएँ
कविताएँ
ग़ज़लें, नज़्में और कविताएँ। कुछ के साथ वीडियो भी है।
84 रचनाएँ
- इन मंजिलों को शायद
- हर शख़्स मुझे बिन सुनेहर शख़्स मुझे बिन सुने आगे जो बढ़ गया
- कितना बेदर्द और तन्हाकितना बेदर्द और तन्हा है मुहब्बत का सफ़र
- मौसम है ये गुनाह कामौसम है ये गुनाह का इक करके देख लो
- मैं गुम हूँ
- तुम क्षमा कर दो उन्हें भी
- पीते हम हैं
- क्यों विलग होता गयाआज निर्गत, नीर निर्झर नयन से होता गया
- जो भी मैंने तुम्हें बताया
- हमें तो याद नहींनहीं थी बात कोई भी जिसे कि भूले हम
- हरदम याद आती हैकोई मुस्कान ऐसी है जो हरदम याद आती है
- क्यूँ करेलायक़ नहीं हैं हम तेरे, तू प्यार क्यूँ करे
- यह स्तुति अब तुम बंद करो
- ये जो मिरी आंखों मेंये जो मिरी आंखों में तैरता हुआ पानी है,
- सब ख़ुद को तलाश करते हैं
- कि तुम कुछ इस तरह आना
- आसमान को काला कर दे
- फ़र्क़ क्या होगाहुस्न औ इश्क़ के क़िस्से तो हज़ारों हैं मगर
- फूल जितने भीफूल जितने भी दिए, उनको सजाने के लिए
- इमरान का बस्ताइमरान का बस्ता, इरफ़ान का टिफ़िन
- मैं किसान हूँ भारत का
- क्या यही है मेरी शिकस्त ?फ़रमाइए...
- मैं समय हूँ, काल हूँ मैं
- निशाचर निरा मैं
- तू जुलम करै अपनौ है कैंतू जुलम करै अपनौ है कैंऽऽऽ
- ये तो तय नहीं था कि
- मत करना कोशिश भी
- मैं हूँ स्तब्ध सी
- दिलों के टूट जाने कीनहीं आवाज़ होती है, दिलों के टूट जाने की
- यहाँ बेकार मेंकल उसे मुर्ग़ा बनाया था, भरे दरबार में
- एक ज़माना था
- अपने आप परकभी क्षुब्ध होता हूँ
- मिट्टी में मिलाया जाएमेरी हस्ती को ही अब जड़ से मिटाया जाए
- क़ायम सवाल रहता हैकोई आएगा, ये मुझको ख़याल रहता है
- दिल का सौदा दिल से करनाशोले की तरह जलना है तो पहले ख़ुद को कोयला करना
- इक सपना बना लेतेज़रा सी आँख लग जाती तो इक सपना बना लेते
- क्या यही तुम्हारा विशेष है?
- सुन लेमैं जहाँ से दिल की कह दूँ
- हँस के रो गएमसरूफ़ अपनी ज़िन्दगी में इतने हो गए
- कुछ नहीं कहाबस कुछ नहीं कहा
- ये मुश्किल बात होती हैसुबह के आगमन से पहले काली रात होती है
- दिल को ही सुनाने दोगर जो गुमनाम हैं, गुमनाम ही मर जाने दो
- 1857इसी मैदान में उस शख़्स को फाँसी लगी होगी
- हर शाख़ पे बैठे उल्लू सेहर शाख़ पे बैठे उल्लू से,
- ये वक़्त कह रहा हैमरना तो सबका तय है, ये वक़्त कह रहा है
- लहू बहता हैलहू बहता है तो कहना कि पसीना होगा
- जीवन का अहसासएक लयबद्ध जीवन जीने की आस
- एक बात तो कॉमन हैचाहे बैठे हों खेत खलिहान में
- आँखों का पानीकभी तू है बादल
- सब चलता हैइस दुनिया में बहुत कुछ बदलता है
- जैसे संसार हमारा हैबीते लम्हों की यादों से
- एक बार तो पूछा होता
- तख़्त बनते हैंतेरे ताबूत की कीलों से उनके तख़्त बनते हैं
- बहुत फ़ज़ीता हैकौन सहारे विश्वासों के जीता है?
- फ़साने भर कोदिल को समझाया, बहाने भर को
- फ़ासले मिटाकेफ़ासले मिटाके, आया क़रीब होता
- वक़्त बहुत कम हैवक़्त बहुत कम है और काम बहुत ज़्यादा है
- अपना भी कोई ख़ाब होइस ज़िन्दगी की दौड़ में, अपना भी कोई ख़ाब हो
- तुमको बताने का क्या फ़ायदाज़िन्दगी में फ़साने बहुत हैं मगर
- मर गए होतेमरना ही शौक़ होता तो मर गए होते
- इससे तो अच्छा हैकरना सियासत, तिजारत की ख़ातिर ।[1]
- मेरा है वास्तातेरा हो या ना हो, मेरा है वास्ता
- जश्न मनाया जायउनकी ख़्वाहिश, कि इक जश्न मनाया जाय
- कैसे कह दूँ कि मैं भी इंसा हूँकैसे कह दूँ कि मैं भी ज़िन्दा हूँ
- ये सूरज रोज़ ढलते हैंजिन्हें मौक़ा नहीं मिलता यहाँ तक़्दीर से यारो।
- नहीं बीतता प्यारयह कविता मैंने अपनी शादी के पच्चीस बरस होने पर लिखी थी। (हे भगवान ! अब तो बत्तीस हो गए... पूरे बत्तीस...)
- यूँ तो कुछ भी नया नहींयूँ तो कुछ भी नया नहीं मेरे फ़साने में !
- कोई साहिलों से पूछेकोई साहिलों से पूछे [1]
- भारत को स्वयं बनाओ'हम' क्या कर सकते हैं ?
- जागोगे नहीं तोजागोगे नहीं
- ऐसे ही उमर गईवो कहाँ गई किधर गई
- भार्या पुरुषोत्तमहे कृष्ण !
- और जाने क्या हुआ उस दिनखिसकते निक्कर को
- रात नहीं कटती थी रात मेंरात नहीं कटती थी रात में, अब दिन में भी कटी नहीं
- प्यार की दरकारपूछ बैठा आज
- ये दास्तान कुछ ऐसी हैजीने के लिए सदक़े कम थे [1]
- वो सुबह कभी तो आएगीवो 'सुबह' जो कभी आनी थी
- छूट भागे रास्तेमंज़िलों की क़ैद से अब छूट भागे रास्ते
- अब मुस्कुरा देआँखें बंद कर ले
- ये मुमकिन नहींहो सकता है
- जीवन संगिनीक़ीमत चुकाई, तो मालूम होगा
- उल्लू की पंचायतन नई है न पुरानी है
- पत्थर का आसमानपूस की रात ने
- इस शहर मेंइस शहर में अब कोई मरता नहीं
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