आदित्य चौधरीकविता · व्यंग्य · सम्पादकीय

84 रचनाएँ

कविताएँ

ग़ज़लें, नज़्में और कविताएँ। कुछ के साथ वीडियो भी है।

84 रचनाएँ
  1. इन मंजिलों को शायद
  2. हर शख़्स मुझे बिन सुनेहर शख़्स मुझे बिन सुने आगे जो बढ़ गया
  3. कितना बेदर्द और तन्हाकितना बेदर्द और तन्हा है मुहब्बत का सफ़र
  4. मौसम है ये गुनाह कामौसम है ये गुनाह का इक करके देख लो
  5. मैं गुम हूँ
  6. तुम क्षमा कर दो उन्हें भी
  7. पीते हम हैं
  8. क्यों विलग होता गयाआज निर्गत, नीर निर्झर नयन से होता गया
  9. जो भी मैंने तुम्हें बताया
  10. हमें तो याद नहींनहीं थी बात कोई भी जिसे कि भूले हम
  11. हरदम याद आती हैकोई मुस्कान ऐसी है जो हरदम याद आती है
  12. क्यूँ करेलायक़ नहीं हैं हम तेरे, तू प्यार क्यूँ करे
  13. यह स्तुति अब तुम बंद करो
  14. ये जो मिरी आंखों मेंये जो मिरी आंखों में तैरता हुआ पानी है,
  15. सब ख़ुद को तलाश करते हैं
  16. कि तुम कुछ इस तरह आना
  17. आसमान को काला कर दे
  18. फ़र्क़ क्या होगाहुस्न औ इश्क़ के क़िस्से तो हज़ारों हैं मगर
  19. फूल जितने भीफूल जितने भी दिए, उनको सजाने के लिए
  20. इमरान का बस्ताइमरान का बस्ता, इरफ़ान का टिफ़िन
  21. मैं किसान हूँ भारत का
  22. क्या यही है मेरी शिकस्त ?फ़रमाइए...
  23. मैं समय हूँ, काल हूँ मैं
  24. निशाचर निरा मैं
  25. तू जुलम करै अपनौ है कैंतू जुलम करै अपनौ है कैंऽऽऽ
  26. ये तो तय नहीं था कि
  27. मत करना कोशिश भी
  28. मैं हूँ स्तब्ध सी
  29. दिलों के टूट जाने कीनहीं आवाज़ होती है, दिलों के टूट जाने की
  30. यहाँ बेकार मेंकल उसे मुर्ग़ा बनाया था, भरे दरबार में
  31. एक ज़माना था
  32. अपने आप परकभी क्षुब्ध होता हूँ
  33. मिट्टी में मिलाया जाएमेरी हस्ती को ही अब जड़ से मिटाया जाए
  34. क़ायम सवाल रहता हैकोई आएगा, ये मुझको ख़याल रहता है
  35. दिल का सौदा दिल से करनाशोले की तरह जलना है तो पहले ख़ुद को कोयला करना
  36. इक सपना बना लेतेज़रा सी आँख लग जाती तो इक सपना बना लेते
  37. क्या यही तुम्हारा विशेष है?
  38. सुन लेमैं जहाँ से दिल की कह दूँ
  39. हँस के रो गएमसरूफ़ अपनी ज़िन्दगी में इतने हो गए
  40. कुछ नहीं कहाबस कुछ नहीं कहा
  41. ये मुश्किल बात होती हैसुबह के आगमन से पहले काली रात होती है
  42. दिल को ही सुनाने दोगर जो गुमनाम हैं, गुमनाम ही मर जाने दो
  43. 1857इसी मैदान में उस शख़्स को फाँसी लगी होगी
  44. हर शाख़ पे बैठे उल्लू सेहर शाख़ पे बैठे उल्लू से,
  45. ये वक़्त कह रहा हैमरना तो सबका तय है, ये वक़्त कह रहा है
  46. लहू बहता हैलहू बहता है तो कहना कि पसीना होगा
  47. जीवन का अहसासएक लयबद्ध जीवन जीने की आस
  48. एक बात तो कॉमन हैचाहे बैठे हों खेत खलिहान में
  49. आँखों का पानीकभी तू है बादल
  50. सब चलता हैइस दुनिया में बहुत कुछ बदलता है
  51. जैसे संसार हमारा हैबीते लम्हों की यादों से
  52. एक बार तो पूछा होता
  53. तख़्त बनते हैंतेरे ताबूत की कीलों से उनके तख़्त बनते हैं
  54. बहुत फ़ज़ीता हैकौन सहारे विश्वासों के जीता है?
  55. फ़साने भर कोदिल को समझाया, बहाने भर को
  56. फ़ासले मिटाकेफ़ासले मिटाके, आया क़रीब होता
  57. वक़्त बहुत कम हैवक़्त बहुत कम है और काम बहुत ज़्यादा है
  58. अपना भी कोई ख़ाब होइस ज़िन्दगी की दौड़ में, अपना भी कोई ख़ाब हो
  59. तुमको बताने का क्या फ़ायदाज़िन्दगी में फ़साने बहुत हैं मगर
  60. मर गए होतेमरना ही शौक़ होता तो मर गए होते
  61. इससे तो अच्छा हैकरना सियासत, तिजारत की ख़ातिर ।[1]
  62. मेरा है वास्तातेरा हो या ना हो, मेरा है वास्ता
  63. जश्न मनाया जायउनकी ख़्वाहिश, कि इक जश्न मनाया जाय
  64. कैसे कह दूँ कि मैं भी इंसा हूँकैसे कह दूँ कि मैं भी ज़िन्दा हूँ
  65. ये सूरज रोज़ ढलते हैंजिन्हें मौक़ा नहीं मिलता यहाँ तक़्दीर से यारो।
  66. नहीं बीतता प्यारयह कविता मैंने अपनी शादी के पच्चीस बरस होने पर लिखी थी। (हे भगवान ! अब तो बत्तीस हो गए... पूरे बत्तीस...)
  67. यूँ तो कुछ भी नया नहींयूँ तो कुछ भी नया नहीं मेरे फ़साने में !
  68. कोई साहिलों से पूछेकोई साहिलों से पूछे [1]
  69. भारत को स्वयं बनाओ'हम' क्या कर सकते हैं ?
  70. जागोगे नहीं तोजागोगे नहीं
  71. ऐसे ही उमर गईवो कहाँ गई किधर गई
  72. भार्या पुरुषोत्तमहे कृष्ण !
  73. और जाने क्या हुआ उस दिनखिसकते निक्कर को
  74. रात नहीं कटती थी रात मेंरात नहीं कटती थी रात में, अब दिन में भी कटी नहीं
  75. प्यार की दरकारपूछ बैठा आज
  76. ये दास्तान कुछ ऐसी हैजीने के लिए सदक़े कम थे [1]
  77. वो सुबह कभी तो आएगीवो 'सुबह' जो कभी आनी थी
  78. छूट भागे रास्तेमंज़िलों की क़ैद से अब छूट भागे रास्ते
  79. अब मुस्कुरा देआँखें बंद कर ले
  80. ये मुमकिन नहींहो सकता है
  81. जीवन संगिनीक़ीमत चुकाई, तो मालूम होगा
  82. उल्लू की पंचायतन नई है न पुरानी है
  83. पत्थर का आसमानपूस की रात ने
  84. इस शहर मेंइस शहर में अब कोई मरता नहीं