आदित्य चौधरीकविता · व्यंग्य · सम्पादकीय

कविता

क़ायम सवाल रहता है

कोई आएगा, ये मुझको ख़याल रहता हैकोई आए ही क्यों, क़ायम सवाल रहता हैकिसी उदास से रस्ते से उसकी आमद कोये मिरा दिल भी तो बैचैने हाल रहता हैनहीं कोई ज़ोर ज़माने का मेरी हस्ती परइसी ग़ुरूर में बंदा मिसाल रहता हैहमारे इश्क़ को हासिल है किस्मतों के करमगली के मोड़ पर हुस्न-ए-जमाल रहता हैयूँ ही मर जाएंगे, इक दिन जो मौत आएगीइसी को सोचकर शायद बवाल रहता है