कविता
तुमको बताने का क्या फ़ायदा
ज़िन्दगी में फ़साने बहुत हैं मगरउनको सुनने सुनाने का क्या फ़ायदारोज़ जीते रहेरोज़ मरते रहेआज तुमको बताने का क्या फ़ायदादेख अपनी ही तस्वीर ऐसा लगाजैसे कोई अजाना सा चेहरा मेरारंग बदलते रहेसंग चलते रहेइसको दिल से लगाने का क्या फ़ायदादोस्तों का यूँ मिल जाना आसान हैकितना मुश्किल है दूरी बनाना मगरअपनी कहते रहेज़ुल्म सहते रहेआज पर्दा उठाने का क्या फ़ायदावास्ता उनसे जान-ओ-जिगर का भी थाजान देने की ख़्वाहिश तो उनकी भी थीदूर जाते रहेकसमसाते रहेअस्ली मक़सद जताने का क्या फ़ायदाकोई कितना भी समझाए हमको यहाँहम मुहब्बत के घावों को सीते नहींवो सताते रहेदिल जलाते रहेआज मरहम दिखाने का क्या फ़ायदाज़िन्दगी का भरोसा नहीं है तो क्यामौत के ही सहारे से जी लेंगे हमवो बरसते रहेहम तरसते रहेज़िक्र अपना चलाने का क्या फ़ायदाअपने बीते हुए दिन न लौटें कभीबीते लम्हे न आएँ कभी लौटकरये ही गाते रहेगुनगुनाते रहेयाद उनको दिलाने का क्या फ़ायदा