कविता
ये जो मिरी आंखों में
ये जो मिरी आंखों में तैरता हुआ पानी है,कुछ और नहींतुझसे मेरे रिश्ते की कहानी हैपैंतीस साल होने को आ रहे हैंकुछ दिन बादअपनी शादी कोमगर लगता है कितेरे मेरे बीचआज भी वही गर्माहटऔर रवानी हैकौन कहता है किख़ूब निबाहा है हमने ?निबाहा तो बिल्कुल नहीं...हमें तो ज़िन्दगी साथ-साथयूँ ही जीते जानी है...