कविता
मेरा है वास्ता
तेरा हो या ना हो, मेरा है वास्ताजाना पहचाना लगता है ये रास्ताउसके खेतों से और उसके खलिहान सेछोटे जुम्मन की फूफी की दूकान सेउसके कमज़ोर कांधों के सामान सेहै मेरा वास्ता, मेरा है वास्तामांगते भीख इंसान इंसान सेसर्द रातों से लड़ती हुई जान सेऔर गाँवों के बनते वीरान सेहै मेरा वास्ता, मेरा है वास्ताआँख से जो न टपकी हो उस बूँद सेकसमसाते हुए दिल की हर गूँज सेबिन लिखे उन ख़तों के मज़मून सेहै मेरा वास्ता, मेरा है वास्ताकरवटों से परेशान फ़ुटपाथ सेउस मुहल्ले के बिछड़े हुए साथ सेऔर हँसिए को थामे हुए हाथ सेमेरा है वास्ता, है मेरा वास्ताउसके अल्लाह से और भगवान सेउसके भजनों से भी, उसकी आज़ान सेऔर दंगों में जाती हुई जान सेहै मेरा वास्ता, मेरा है वास्ताउसके चूल्हे की बुझती हुई आग सेउस हवेली की जूठन, बचे साग सेटूटी चूड़ी के फूटे हुए भाग सेहै मेरा वास्ता, मेरा है वास्ताकम्मो दादी की धोती के पैबंद सेऔर पसीने की आती हुई गंध सेउसके जूआ छुड़ाने की सौगंध सेहै मेरा वास्ता, मेरा है वास्ताउसकी छत से टपकती हुई बूँद सेसरहदों पर बहाए हुए ख़ून सेज़ुल्म ढाते हुए स्याह क़ानून सेतेरा हो या ना हो, तेरा हो या ना हो, मेरा है वास्ताजाना पहचाना लगता है ये रास्ताकितना अपना सा लगता है ये रास्तामेरा है वास्ता, मेरा है वास्तामेरा है वास्ता, मेरा है वास्ता
