कविता
हमें तो याद नहीं
नहीं थी बात कोई भी जिसे कि भूले हमरही हो याद कोई भी हमें तो याद नहींकुछ इस तरहा गुज़री ये ज़िन्दगी अपनीजिया हो लम्हा कोई भी हमें तो याद नहींहरेक चोट पे मरहम लगा के देख लियाभरा हो ज़ख़्म कोई भी हमें तो याद नहींपिलाई हमको गई, नहीं किसी से कमहुआ हो हमको नशा भी हमें तो याद नहींमिले थे लोग बहुत, चले थे साथ कईबना हो दोस्त कोई भी हमें तो याद नहीं